DIPLOMA IN AYURVEDA SCIENCE

(Two Year)

IST YEAR

  1. PAPER 1 : COMMUNICATIVE ENGLISH AND COMPUTER FUNDAMENTALS
  2. PAPER 2: ANATOMY AND PHYSIOLOGY
  3. PAPER 3: AYURVEDIC ITIHASA
  4. PAPER 4: DRVYA GUNA AND RASA SHASTRA
  5. PAPER 5: BASICS OF AYURVEDA
  6. PAPER 6: PRACTICAL- I
  7. PAPER 7: PRACTICAL-II
  8. PAPER 8: PRACTICAL-III
  9. PAPER 9: PRACTICAL-IX
  10. PAPER 10: PRACTICAL-X

IIND YEAR

  1. PAPER 1: AYURVEDIC MEDICINE THEORY
  2. PAPER 2: AYURVEDIC DRUGS
  3. PAPER 3: DIABETIC CARE IN AYURVEDA
  4. PAPER 4: PRACTICAL- I
  5. PAPER 5: PRACTICAL- II
  6. PAPER 6: PRACTICAL- III

विषय सूची (प्रथम वर्ष)

Communicative English

Communication, Phonetics,Communicative Grammar,Patterns of Sentences.

Computer Fundamental (MS Office)

कम्प्यूटर का परिचय, विंडोज का परिचय, MSOffice के बारे में संक्षिप्त जानकारियाँ, बेसिक आफ MSOffice टूल्स .

शरीर रचना विज्ञान :

शरीरोपक्रम शारीर – शारीर एवं शरीर, शरीर की उत्पत्ति, शारीर ज्ञान का प्रयोजन, आयुर्वेद का प्रयोजन, शारीर शास्त्र विभाग , सुश्रुतोक्त प्रत्यंग विभाग, चरकोक्त प्रत्यंग विभाग , कोष्ठ एवं कोष्ठांग, मृत शरीर का शोधन एवं सरंक्षण, शव विच्छेदन एवं संरक्षण विधि I

अभिनिवृति शारीर- धातुभेद से पुरुष का संगठन, आत्मा की मान्यता, न्याय दर्शन, वैशेषिक दर्शन, मीमांश दर्शन , सांख्य दर्शन वेदांत योग दर्शन, आयुर्वेद दर्शन, शरीर की पञ्च भौतिकता एवं शरीर की सूक्ष्मता , पञ्च महाभूतों से शरीर की उत्पत्ति, शरीर एवं पञ्चमहाभूत, दोष धातु एवं मल, तन्मात्राओं से पञ्च महाभूतों की उत्पत्ति, कर्म पुरुष अथवा चिकित्स्य पुरुष, शरीर का त्रिगुनात्मकत्व, त्रिगुण की क्रिया विधि, त्रिदोष एवं त्रिगुण I

परिभाषा शारीर – शारीरावयव विभाग- त्वचा, कला, धातु उपधातु, मल, दोष, आशय, बहि:स्त्रोतस, कंडरा, जाल, कूर्च, मांसरज्जों, सेवनी, सन्धात, उभयेंद्रिय, मन, शीमंत, अस्थि, संधि, स्नायु , पेशी , शिरा, धमनी, कोष्ठ एवं कोष्ठांग, मर्म, प्राण एवं प्राणायतन, ज्ञानेन्द्रिय एवं कर्मेन्द्रिय I

गर्भ शारीर – गर्भ की परिभाषा, गर्भावक्रान्ति, शुक्र शोणित , जिव संयोग, सूक्ष्म शरीर की विशेषता, गर्भोत्पत्ति एवं विकास और भाव, शुक्राणु, डिम्ब, कलल की उत्पत्ति, गर्भ, भ्रूण, गर्भ का पोषण, गर्भ में अंग प्रत्यंग निर्माण एवं संस्थानों का विकास, गर्भ में पञ्च महाभूतों का भूत व्यापार, गर्भज विकृतियाँ एवं उनके कारण I

प्रकृति प्रमाण शारीर- प्रकृति शारीर, लक्षण, निर्माण, दोषों की उत्कटावश्था, समप्रकृति, वातल, पित्तल, श्लेष्मल पुरुष, प्रकृति के उत्पादक कारण, जन्मोत्तर कालीक प्रकृति के विकास में सहायक तत्व, व्यक्तित्व के विकास का आधार, प्रकृति का वर्गीकरण पित्त प्रकृति पुरुष, श्लेष्म प्रकृति पुरुष, त्रिदोषज समप्रकृति, मानस प्रकृति I

अस्थि शारीर- अस्थियों के कार्य, प्रकार्य, संख्या, अस्थि विवरण में प्रयुक्त पारिभाषिक शब्द, अस्थियों की गणना एवं नामकरण के सम्बन्ध में चरक सुश्रुत एवं आधुनिक मत अस्थियों का वर्गीकरण- उर्ध्व शाखा की अस्थियाँ, मणिबंध की अस्थियाँ, कर्मस्थियाँ , अधोशाखा की अस्थियाँ, मध्य शरीर की अस्थियाँ, सिर व् ग्रीवा की अस्थियाँ I

तन्त्र शारीर- योग का स्वरूप, शरीर की विशिष्ट शक्तियां, सुषुम्ना का महत्व, कुंडलिनी शक्ति, चक्रों का फल, षटचक्रों का चिकित्सीय आधार I

शरीर क्रिया विज्ञान

पुरुष विवेचन- पुरुष की उत्पत्ति, परिभाषा, सुश्रुत एवं चरक सम्मत पुरुष की उत्पत्ति, पुरुष की रचना में देह परमाणु, रज एवं तम का प्रभाव, उतक निर्माण, कोषकीय रचना, कोष द्रव्य, केन्द्रक, कोष की विशेषताएं, उतक अंग एवं तंत्र की उतपत्ति I

त्रिदोष विवेचन-दोष, दोष के अधिष्ठान, परिभाषा, संख्या और इनका द्र्व्यत्व, धातु, शरीर की रचनात्मक इकाई, धातुओं का प्रमाण देह परमाणु से धातु की उत्पत्ति धातु धारणत्व, मल, त्रिगुण, त्रिदोष, पञ्च महाभूत, वात पित्त कफ दोष की विशेषताएं, देह का दोष स्थान से विभाजन, वात, पित्त एवं श्लेष्म का स्थान I

क्रिया काल विवेचन- क्रियाकाल , काल के विभाग, सुश्रुत का काल विभाजन , क्रियाकाल की उपयोगिता, महत्व , विषम दोषों का कारण, चरक एवं वाग्भट का मत, संचयावस्था, प्रकोपवस्था, प्रशमावस्था, व्याधि के उत्पत्ति एवं उनके आंतरिक, वाह्य कारण I

प्राकृत श्लेष्मा विवेचन- श्लेष्मा वर्ग अथवा श्लेष्म संस्थान, श्लेष्मा – निरुक्ति , तमोबहुल्य, श्लेष्मा का संगठन, स्वरूप, विसर्ग स्वरूप. गुण, क्लेदक कफ – क्रियाशीलता, अवलम्बक श्लेष्मा, बोधक श्लेष्मा, तर्पक श्लेष्मा, श्लेषक श्लेष्मा, श्लेष्म विकार, श्लेष्म प्रकोप, श्लेष्म वृद्धि और क्षय के लक्षण I

प्राकृत पित्त विवेचन- पित्त शब्द की निरुक्ति, पित्त का स्वरुप, गुण, तेजसत्व, कार्यक्षमता, स्थान, पित्त का कार्य, पित्त एवं आहार, अग्नि एवं पित्त, पित्त एवं प्रकिण्व, पित्त एवं भुताग्निपाक, पाचक पित्त , रंजक पित्त , साधक पित्त , आलोचक एवं भ्राजक पित्त, पित्त विकार के लक्षण, पित्त विकारों के स्वरुप, पित्त विकारों के भेद, पित्त प्रकोप के कारण व लक्षण, पित्त वृद्धि एवं क्षय के लक्षण I

प्राकृत वात विवेचन- वात संस्थान, लोकवात एवं शरीर वात, प्राण वायु, उदान वायु वात विकार- स्वरुप लक्षण, भेद क्रियाविधि , वात प्रकोप के कारण, प्रकुपित वात के लक्षण, वात वृद्धि एवं क्षय के लक्षण I

आहार विवेचन- आहार के कार्य, संगठन, हिताहित एवं संतुलित आहार, आहार का वर्गीकरण, मात्रा, सर्वग्रह-परिग्रह मात्रा, पञ्च भौतिक आहार, षडरस आहार, रसों द्वारा दोष प्रशमन, रसों की उत्पत्ति, आहार का जीव रासायनिक वर्गीकरण, आहार के विविध द्रव्य I

रस-रक्त परिभ्रमण विवेचन रस रक्त परिसंचरण- ह्रदय की स्थिति, कपाट, ओजोवहा धमन, हृदय की रचना, हत्पेशी के गुण, धमनी, धमनिका, कोशिका, शिरा, रक्त चाप न्यूनतम, संचुकन, शिथिलन रक्तचाप, नाड़ीदाब, रक्त चाप के कार्य, नापना शिरागत दाब, धमनीगत रक्त चाप नियंत्रण, रक्तचाप पर रासायनिक नियन्त्रण, नाडी परिक्षण का सिद्धांत और विधि, दोषानुसार नाडी की गति, जीवसक्षिणी नाडी, नाडी परीक्षा की विशेषताएं, नाडी का रेखांकन, विशिष्ट प्रकार की नाडी I

धातु विवेचन-

रस धातु- रक्त रस, लसिका, उतक द्रव, रसज रोग, रस धातु के कार्य, भेद, रस धातु की वृद्धि व् क्षय I

रक्त धातु – रक्त का स्वरुप, गुण धर्म, उत्पत्ति, कार्य संगठन, रक्त स्कंदन, रक्त की मात्रा, आयतन, रक्त कणों की उत्पत्ति, रक्त मज्जा, लाल व श्वेत कण हिमोग्लोबिन, रक्त क्षय व् वृद्धि I

मांस धातु – मांस धातु, मांस धरा कला, पेशी रचना, मांस धातु का संगठन, कार्य, मांस, उतक , मांस धातु की उपधातु एवं मल, मांस वृद्धि व क्षय के लक्षण I

मेदो धातु – मेदो धातु, स्वरुप एवं रचना, संगठन, पाचन एवं शोषण, मेद का वर्गीकरण, मेदोग्नि, मेदो धातु के कार्य, भेद, क्षय एवं वृद्धि के लक्षण I

अस्थि धातु – अस्थि धातु का स्वरुप, रचना, कोष, सूक्ष्म रचना एवं भेद, सुश्रुत का अस्थि प्रकार, अस्थि धातु की उत्पत्ति, अस्थि का कार्य, अस्थि के उपधातु एवं मल, अस्थि वृद्धि एवं क्षय के लक्षण I

मज्जा धातु – मज्जा धातु, रक्त मज्जा की अस्थियों में स्थिति, उत्पत्ति, कार्य, मज्जा में रक्त आपूर्ति, लाल रक्त कणों का निर्माण, मज्जा की उपधातु एवं मल, मज्जा धातु के वृद्धि एवं क्षय के लक्षण I

शुक्र धातु- शुक्र धातु, संगठन, उत्पत्ति, शुक्रोत्पादक, अवयव, वृषण, वृषण ग्रंथि के कोष, शुक्रांड की अवस्थाएं, रचना, स्त्री शुक्र, क्रोमोसोम, शुक्राणु की गति एवं आयु, धातु पाक, शुक्राशय, अष्ठिला, शिश्न , शिश्न के कार्य, बाह्य एवं आन्तरिक तत्व, शुक्रोत्पत्ति, आंतरिक तत्व के कार्य, शुक्र का मल व् उपधातु, शुक्र व् मैथुन क्रिया, शुक्र में विकृति, शुक्र वृध्दि, एवं क्षय के लक्षण I

ओज धातु – परिभाषा, गुण, संगठन उत्पत्ति एवं स्थान , ओज के कार्य , ओज एवं बल भेद I

आयुर्वेदिक इतिहास

आयुर्वेदीय इतिहास की सामग्री- अनैतिहासिक साहित्य, इतिहासपरक साहित्य, पुरातत्व सामग्री, आयुर्वेदावतरण, आयुर्वेद का शाश्वत्व, नियत्व एवं अनादित्व I

वैदिक वांगमय- वेद, ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, वेदों में आयुर्वेद आयुर्वेद का उप्वेदत्व, वैदिक आचार्य- ब्रह्मा, विष्णु, शिव, भाष्कर, दक्ष प्रजापति, अश्वनि कुमार, इंद्र, वरुण I

उपनिषादि में आयुर्वेद- उपनिषदों में आयुर्वेद, ब्राह्मण ग्रंथों में आयुर्वेद, पुराणों में आयुर्वेद, व्याकरण शास्त्र में आयुर्वेद, पाणिनि, कात्यायन, पतंजलि, चरक, स्मृति ग्रंथों में आयुर्वेद I

श्रमण वांगमय में आयुर्वेद- जैन धर्म एवं साहित्य में आयुर्वेद, बौध धर्म एवं साहित्य में आयुर्वेद, विनयपिटक में आयुर्वेद I

संहिता काल ग्रन्थ एवं आचार्य – संहिता काल, आत्रेयादि सम्प्रदाय, धान्वंतर सम्प्रदाय, सुश्रुत संहिता, चरक संहिता, कश्यप, अग्निवेश, सुश्रुत, पराशर, भोज, पौष्कलावत, विदेह, चरक, नागार्जुन, वात्स्य I

संग्रह काल- संग्रह काल, वाग्भट- वृद्ध, लघु वाग्भट, अष्टांग संग्रह, अष्टांग हृदय, माधव निदान, भैषज्य रत्नावली I

आयुर्वेद का सार्वभौमत्व – सुमेर, बाबुल, असुर, मिश्र व् चीनी संस्कृति, फारस अरबी एवं रोमन संस्कृति, तिब्बति संस्कृति, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद I

आयुर्वेदीय शिक्षण पद्धति – आयुर्वेद की प्राचीन शिक्षण पद्धति, आयुर्वेदीय शिक्षा का उद्देश्य, आयुर्वेदीय विद्या के अधिकारी, शिष्य, आचार्य शास्त्र उपनयन अध्ययन काल एवं स्थान, अध्ययन – अध्यापन विधि, प्राचीन कालीन विश्विद्यालय, तक्षशीला, विक्रमशिला नालंदा विश्वविद्यालय I विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनीसेफ, एफ. ए. ओ. , आई . एल . ओ., केयर I

द्रव्य-गुण शास्त्र

द्रव्यगुण शास्त्र- परिभाषा, प्रयोजन, महत्व, औषध का युक्ति युक्त प्रयोग द्रव्यगुण के विभाग I

द्रव्य निरूपण- द्रव्य का लक्षण, पंच्भौतिकता, औषधत्व, प्रधान्यत्व, द्रव्य का वर्गीकरण, चेतन अचेतन भेद, कार्य कारण भेद, निष्पत्ति भेद, योनिभेद, प्रयोगभेद, चरक सुश्रुत वाग्भटोक्त वर्गीकरण I

गुण निरूपण- गुण शब्द, निरुक्ति , व्याख्या, लक्षण, गुणों का वर्गीकरण I

रस निरूपण- रस शब्द के विविध अर्थ, निरुक्ति, लक्षण, रस संख्या, रस ज्ञान, रसों की पञ्चभौतिकता, षडरस, षड रसों का लक्षण , रसों के लक्षण, दोष धातु मलों पर रसों का कर्म, औषध रसों का प्रयोग कर्म I

विपाक निरूपण- पर्याय, निरुक्ति , अवस्थापक व निपाक, विपाक–स्वरुप कार्यक्षेत्र, प्रकार, विपाक के गुण कर्म, तारतम्य, रस विपाक भेद I

वीर्य निरूपण- व्युत्पत्ति, निरुक्ति, तात्पर्य, परिभाषा, स्वरुप,गुण, वीर्यवाद, द्रव्य वीर्यवाद, वीर्य का कार्यकाल, वीर्य का निर्धारण I

प्रभाव निरूपण- निरुक्ति, परिभाषा, स्वरूप, प्रभावजन्य कर्म, प्रत्यायरब्ध I

द्रव्याश्रित रसादि गुणों का परस्पर सम्बन्ध- प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चर्तुर्थ नियम, द्रव्य की रसादि एकरूपता एवं विरूपता I

कर्म निरूपण- पर्याय, निरुक्ति, परिभाषा, स्वरुप, लक्षण, कर्म, भेद, चरक के अनुसार कर्म प्रक्रिया, द्रव्यों का विभिन्न स्थानों में कर्म I

द्रव्यों का शोधन- शोधन, द्रव्यों की विविध शुद्धियाँ, शोधन का प्रयोजन, शोधन की प्रक्रिया, विशिष्ट द्रव्यों का शोधन, कृतिम द्रव्य एवं अपमिश्रण, प्रतिनिधि द्रव्य I

रस-शास्त्र

रस शास्त्र का ऐतिहासिक विवेचन- रस शास्त्र का इतिहास, मंत्र तंत्र , कुल मार्ग, सिद्ध सम्प्रदाय या नाथ सम्प्रदाय, रस शास्त्र के ग्रन्थ, ग्रन्थकर्ता और उनका काल, प्राचीन भारत में रसायन का विकास, भारतीय रस शास्त्र, आयुर्वेदीय रस शास्त्र, रस शाला में संग्रह योग्य औषधियां और उनका महत्व I

परिभाषा एवं द्रव्य वर्ग प्रकरण- परिभाषा, लक्षण, परिभाषा ज्ञान की उपयोगिता, आवाप, निर्वाप ढलान श्वेत वर्ग I

यंत्रोपकरण- यन्त्र शब्द की निरुक्ति, विभिन्न यंत्र- उलखुल, खल्व, कच्छप , उर्ध्वपातन, तुला, तिर्यक पातन, दोला, डमरू , पाताल, विद्याधर , पुट एवं स्वेदन यंत्र, मुषा मुद्रा, पुट I

पारद प्रकरण- पारद के पर्याय, परादोत्प्ति, पारद के भेद , खनिज, प्राप्ति स्थान, दोष, शोधन, संस्कार, शोधन एवं संस्कार में भेद, पारद की गतियाँ, पारद बन्ध – जारण, मूर्च्छना, कंजलि I

महारस, उपरस एवं साधारण रस प्रकरण- रस , महारस व् उपरस वर्ग, अभ्रक- मारण, भस्म, परीक्षा, अमृतीकरण, वैक्रांत, माक्षिक, विमल शिलाजतु, सस्थक, चपल, रसक, गंधक, गैरिक, कासिस, स्फटिका, हरताल, मन : शिला , अंजन, रसांजन, कंकुष्ठ, कम्पिल्लक, संखियां, नवसादर, कर्पद, अग्निजार, गिरिसिंदुर, हिंगुल I

धातु – उपधातु प्रकरण- धातु, धातुओं का इतिहास एवं वर्गीकरण, लौह धातुओं की औषधीय उपयोगिता, स्वर्ण , रजत , ताम्र, लौह, मंडूर वंग (टिन), नाग (लीड) यशद, पीतल, वर्त लौह I

विष एवं उपविष प्रकरण- विष, विष के भेद, वत्सनाभ, वत्सनाभ के उपविष, कुचिला, अहिफेन, जयपाल, धतुरा, भंगा, गुंजा, औषधि योग ज्ञान I

बेसिक्स ऑफ़ आयुर्वेद (आयुर्वेद के सिद्धांत)

आयुर्वेद परिचय – आयुर्वेद शब्द का अर्थ, आयुर्वेद की व्युत्पति, आयु के पर्याय, आयु का प्रमाण – अप्रमाण, आयु का परिमाण, आयुर्वेद के पर्याय, आयुर्वेद का स्वरूप, हिताय, अहिताय, आयुर्वेद की परिभाषा, आयुर्वेद का प्रयोजन, आयुर्वेद वितरण, आयुर्वेद का क्रमिक विकास, आयुर्वेद की नित्यता, आयुर्वेद की विशेषता, आयुर्वेद का उद्देश्य I

आयुर्वेद की आचार्य परम्परा – आत्रेय की परम्परा, धन्वन्तरी की परम्परा, आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथकार एवं उनके ग्रन्थ, चरक, चरकसंहिता, सुश्रुत –सुश्रुत संहिता, वाग्भट – अष्टांग संग्रह, वाग्भट द्वितीय – अष्टांग ह्रदय, माधव- माधव निदान I

आयुर्वेद के आठ अंग या आष्टांग आयुर्वेद – शल्य तन्त्र, शालाक्य तन्त्र, का्य चिकित्सा तंत्र, भुत विधा तन्त्र, कौमार भृत्य तन्त्र, अगद तन्त्र, रसायन तन्त्र, वाजीकरण तन्त्र I

आयुर्वेद के मौलिक सिध्दांत – त्रिगुण, पंचमहाभूत, त्रिदोष, सप्त धातुं,त्रयोदशाग्नि, त्रीमल I

आयुर्वेदिक रोग विज्ञान- रोग परीक्षा, निदान पंचक, त्रिविध परीक्षा, चतुर्विध परीक्षा, षड विध परीक्षा, रोगी परीक्षा, वाग्भट का त्रिविध परीक्षा, दश विध परीक्षा, अष्ट विध रोगी परीक्षा I

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति- पञ्च कर्म चिकित्सा , रसायन एवं वाजीकरण चिकित्सा I

आयुर्वेदिक वनस्पति एवं औषधि- तुलसी, हरिद्रा, सर्पगंधा, धृतकुमारी, गूगल (गुग्गुल), ब्राह्मी, आवंला, नीम, मेथी, पुदीना, जामुन, गेंदा, बाबुना, लांगली, लेडी फर्न इत्यादी I